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रामायण सेंटर की तीसरी वर्षगांठ

रामायण सेंटर की तीसरी वर्षगांठ

30 जून 2020

उच्चायुक्त श्री तन्मय लाल का संदेश

 

माननीय श्री अरुण जी और डॉ. विनोदबाला जी,

यहाँ उपस्थित सभी गणमान्य अतिथि,

गुरुजन और भक्त जन,

 

आप सभी को मॉरिशस के इस सुन्दर रामायण सेंटर की स्थापना की तीसरी वर्षगाँठ के अवसर पर बहुत शुभकामनाएँ

 

रामायण हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है और हम सब की सांस्कृतिक धरोहर भी है ।

भगवान राम की कथा हज़ारों सालों से बहुत लोकप्रिय और मार्गदर्शक रही है । केवल भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी । पिछले कुछ दशकों में कॉमिक्स या चित्र कथाओं, टीवी धारावाहिकों और फिल्मों के माध्यम से इसका प्रचार निरंतर होता रहा है और युवा पीढ़ी भी इसको उसी उत्साह से सुनती और ग्रहण करती है ।

रामायण श्री राम जी के जीवन के माध्यम से जिन विषयों को उजागर करती है वे आज भी प्रासंगिक हैं । श्री राम के जीवन में निरंतर कठिनाइयाँ रहीं, पर उन्होंने सदा अपने व्यवहार में एक संतुलन बनाए रखा । राम कथा हम सभी को जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रेरणा देती है और मार्गदर्शन करती है ।

ऐसा माना जाता है कि वाल्मीकि जी की संस्कृत रामायण आज से लगभग 2400 साल पहले लिखी गई थी । एक तरह से यह ग्रंथ इससे पहले लिखे गए वेदों, उपनिषदों और धर्म शास्त्रों के सार को राम कथा के रूप में प्रस्तुत करता है ।

रामायण और महाभारत दोनों ही ग्रंथ मूलत: ‘धर्म’ की बात करते हैं ।

इन महान ग्रंथों में समाज में विभिन्न परिस्थितियों में कर्म, राजधर्म, नैतिकता, न्याय, धर्मसंकट, संतुलन, निरंतर बदलाव और विविधता जैसे कठिन विषयों के बारे में अनेक उदाहरण मिलते हैं । इस विषयों को इन ग्रंथों में बहुत सहज रूप से दर्शाया और समझाया गया है ।

रामायण की कहानी भारत के पूरे भूभाग, उत्तर से दक्षिण और श्रीलंका तक फैली है । आज भी उससे जुड़े अनेक स्थानों को लोग पहचानते हैं ।

रामायण की कहानी बौद्ध और जैन धर्म में भी मिलती है ।

लगभग एक हज़ार साल पहले से भारत के कई अन्य भागों में अनेक भाषाओं में कई लेखकों ने कई रामायण लिखीं । पहले दक्षिण और फिर पूर्वी भारत में । फिर लगभग 400 साल पहले तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की जो कि आज भी उतनी ही लोकप्रिय है । इनमें भक्ति भाव की बहुत महत्ता है ।

रामायण भारत के बाहर व्यापारियों और अन्य यात्रियों द्वारा ले जाईं गईं । उत्तर में पंजाब और कश्मीर से चीन और तिब्बत की ओर, पूर्व में बंगाल से बर्मा, थाईलैंड और लाओस, कंबोडिया की ओर, और दक्षिण में जावा और सुमात्रा की ओर ।

इन सभी देशों में रामायण आज भी लोकप्रिय है । थाईलेंड में अयोध्या नाम का एक प्रसिद्ध नगर है । आज भी वहाँ हज़ारों की संख्या में थाई नागरिक और विदेशी सैलानी जाते हैं । वहाँ के शासक आज भी राम की उपाधि लेते हैं । थाई नृत्य में राम कथा प्रसंगों का एक मुख्य स्थान है । इंडोनेशिया में बाली में मुस्लिम धर्म के लोग आज भी भव्य रामलीला प्रस्तुत करते हैं ।

आज भारतीय मूल के लोग विश्व भर में बसे हैं और कार्यरत हैं । रामायण भी आज विश्व भर में पढ़ी और पढ़ाई जाती है ।

हर वर्ष रामलीला द्वारा रामायण और रामकथा को भारत के शहर शहर और गाँव गाँव में प्रस्तुत किया जाता है । लोग हर वर्ष रामलीला को उतने ही उत्साह से देखते हैं । सन 2005 में रामलीला को यूनेस्को द्वारा वैश्विक धरोहर के रूप में सम्मान मिला ।

मॉरिशस में भी जब भारतीय मूल के लोग आए तो उनमें से अनेक अपने साथ गिनी चुनी चीज़ों में रामायण साथ में लाए । मुझे बताया गया है 19 वीं शताब्दी में यहाँ भी रामलीला मनाई जाती थी ।

रामायण सेंटर रामकथा, रामलीला और अन्य परम्पराओं को बढ़ावा देने में कार्यरत है ।

अन्त में आप सब को एक बार फिर रामायण सेंटर की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर बहुत शुभकामनाएँ

धन्यवाद

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