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Launching of Indradhanush Special Issue

Launching of Indradhanush Special Issue

हिंदीप्रचारिणी सभा

11जुलाई2020

Remarks by High Commissioner TanmayaLal

 

माननीयकला एवं सांस्कृतिक धरोहर मंत्री श्री अविनाश तीलक जी,

माननीय भूतपूर्व उप राष्ट्रपति रऊफ़ बंधन जी,

​Hon. Chief Government Whip​​​ Naveena Ramyad,

Hon. Members of Parliament,

इन्द्रधनुष सांस्कृतिक परिषद् के प्रधान श्री प्रहलाद रामशरण जी,

हिंदी प्रचारिणी सभा के प्रधान श्री धनराज शम्भू जी ,

यहाँ उपस्थित सभी गणमान्य अतिथि और हिंदी प्रेमियों,

आप सभी को मेरा नमस्कार ।

 

सर्वप्रथममैं इन्द्रधनुष सांस्कृतिक परिषद् और हिंदी प्रचारिणी सभा के प्रति आभार प्रकट करता हूँ जिन्होंने आज यहाँ मुझे आपके बीच आने का अवसर दिया ।

आज का ये विशेष आयोजन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक ऐसे व्यक्ति का स्मरण करता है जिन्होंने मॉरिशस में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में अभूतपूर्व योगदान देकर उसको एक नए मुक़ाम तक पहुँचाया ।


इस अवसर पर इन्द्रधनुष पत्रिका के जिस विशेषांक का आज यहाँ लोकार्पण हो रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है ।

मैंने इस विशेषांक को बहुत रूचि से पढ़ा है । इसके द्वारा मुझे श्री सूर्य प्रसाद मंगर भगत जी के योगदान; उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं; और मॉरिशस में हिंदी भाषा के प्रचार के बारे में ही नहीं, बल्कि मॉरिशस के पिछलेसौ वर्षों के इतिहास के विभिन्न पहलुओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त हुई । इससे मुझे मॉरिशस को और समझने का अवसर मिला है ।

इस विशेषांक में अनेक विद्वानों द्वारा श्री सूर्य प्रसाद मंगर भगत, उनके सहयोगियों और मॉरिशस में हिंदी भाषा के विषय में लिखे गए अत्यंत शिक्षाप्रद लेखों का संकलन है । मैं इस प्रकाशन के लिए इन्द्रधनुष सांस्कृतिक परिषद को बधाई देता हूँ ।

1935में भारतीय आप्रवासियों के आगमन की 100 वीं वर्षगाँठ पर हिंदी प्रचारिणी सभा की स्थापना राजनीति से परे एक संस्था के रूप में हुई थी जो अपने आप में बहुत दूरदर्शी और महत्वपूर्ण थी ।

आपकी अनुमति से मैं कुछ शब्द अंग्रेज़ी में भी कहना चाहूँगा :

It is indeed remarkable to see how individuals like Surya Prasad MungurBhagat, his family, close friends and other tall leaders understood the close link between the language and cultural heritage, ideas, values, traditional knowledge and even identity.

They understood the importance of promoting Hindi despite facing with severe odds and struggling under a colonial rule.

They also took upon themselves to encourage and lead the younger generations to take up Hindi studies even if on a purely voluntary and in an informal setting initially.

The story of how these dedicated and committed people expanded the space for Hindi language, not only through teachingthe younger generation, but also through their contribution to enriching the literature and bringing a Mauritian perspective to Hindi poetry and other literary works, is truly inspirational.

इस लगभग एक शताब्दी के सफ़र के बारे में इस विशेषांक से बहुत कुछ पता चलता है । श्री सूर्य प्रसाद मंगर भगत के प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम; उनका सादगी भरा जीवन; उनकी कर्मठता; हिंदी साहित्य के प्रति उनका लगाव और हिंदी भाषा की अनेक शैलीयों में उनका लेखन; पत्रकारिता से उनका गहरा लगाव; उनका प्रशासनिक कौशल और उनके हिंदी प्रचारिणी सभा के मार्गदर्शन के बारे में ।

इन लेखों से जो एक और बात सामने आती है वह है मॉरिशस और भारत के हिंदी प्रेमियों के बीच गहरा और निरंतर वार्तालाप और सहयोग ।

Both our countries faced the same struggle against colonialism and struggle for Independence.

Over the past 100 years, there have been regular visits by Indian and Hindi scholars to Mauritius. Several Mauritian dignitaries and leaders travelled to India for their studies and there has been active collaboration between institutions such as the Hindi PrachariniSabhaand Indian institutions that helped in promoting Hindi studies through conduct of examinations and formalizing Hindi education.

These joint efforts also helped promote Hindi outside India and Mauritius. Shri Surya Prasad MungueBhagat attended the 1stVishwa Hindi Sammelan in Nagpur in 1975. I understand from this special issue that Mauritian artists presented a play of DharamvirBharati- AndhaYug - which was historic as it was the first time a Hindi play was staged by a team from outside India on a stage in India.

The push to promote Hindi language at the United Nations also took shape during this time. A formal motion was proposed during the second Vishwa Hindi Sammelan that Mauritius hosted in 1976. It was a great triumph for the Hindi lovers, especially in Mauritius.

मॉरिशस में हुए दूसरे विश्व हिंदी सम्मेलन के एक साल बाद भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में अपना भाषण दिया ।

आज हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है ।

हिंदी आज केवल भारत, मॉरिशस अथवा कुछ अन्य देशों में ही सीमित नहीं है, बल्कि हिंदी भाषी लोग अब दुनिया भर के कई देशों में बसे हैं या कार्यरत हैं । आज विश्व में लगभग 73 देशों में 300 संस्थानों में हिंदी पढ़ाने की व्यवस्था है ।

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है । उनके द्वारा अपने सोशल मीडिया पर हिंदी में पोस्ट और हिंदी में समाचार बुलेटिन का प्रसारण गत वर्ष से आरम्भ हुआ है ।

यहाँ विश्व हिंदी सचिवालय के प्रोफेसर विनोद कुमार मिश्र उपस्थित हैं और वे जानते हैं कि जैसा मैंने अन्य मंचो से भी कहा है,हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि हिंदी केवल साहित्य की पारंपरिक विधाओं में सिमट कर न रह जाए, बल्कि उसका प्रयोग हर विषय जैसे विज्ञान और technology, medicine, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, राजनीति, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, प्रबंधन आदि में भी हो सके। इसकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता है । इसके लिए हिंदी की उपयुक्त शब्दावली पर भी काम करना होगा ।

युवा पीढ़ी में हिंदी के प्रति रुचि बनाए रखना हम सब के लिए एक चुनौती है जहाँ cinemaऔर popular culture इसमें मदद कर सकते हैं वहीं नएIT platformsभी इसमें बहुत सहायक हो सकते हैं ।

जहाँ भारत में हिंदी को एक राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त है, वहीं मॉरिशस वासियों, उनके अनेकानेक संस्थानों और मॉरिशस सरकार का हिंदी और अन्य भाषाओं के प्रयोग को न केवल जीवित रखने बल्कि आगे बढ़ाने में बहुत सराहनीय योगदान रहा है ।

मॉरिशस का हिंदी साहित्य बहुत ही सम्मानित रहा है और यहाँ के लोगों की हिंदी भाषा में रूचि बहुत सराहनीय है ।

हमें विश्वास है कि अनेक स्तरों पर जारी ये प्रयास हिंदी भाषा के प्रचार और प्रसार में सफलता प्राप्त करते रहेंगे ।

अंत में मैं एक बार फिर इन्द्रधनुष सांस्कृतिक परिषद् और हिंदी प्रचारिणी सभा को धन्यवाद देता हूँ और आने वाले समय में उनके कार्य की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ ।

धन्यवाद

 

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